ईकोफ्रैंडली होली

दिंनाक: 23 Mar 2016 10:50:13


वैसे तो त्योहारों की खुशियां उनके पारम्परिक स्वरूपों में ही बसती हैं, लेकिन अगर परम्पराएं पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने लगे तो उन परम्पराओं को थोड़ा लचीला करना ही बेहतर होगा, आने वाले कल के लिए। आज होलिका दहन होगा, इसके साथ ही प्रकृति का अनुपम उपहार पेड़ों को भी बड़ी तादाद में जलाया जाएगा, अगर हम थोड़े से सार्थक प्रयास करें तो होली को ईकोफ्रैंडली बनाया जा सकता है। साथ ही रोका जा सकता है प्रकृति में होने वाले असंतुलन को भी।

लकडि़यों के प्रयोग से पेड़ों की कटाई बढ़ जाती है, इसलिए विकल्पों का प्रयोग सबसे बेहतर उपाय है।

गोबर के कंडे न सिर्फ लकड़ी का सर्वोत्तम विकल्प हैं, जिनसे प्रकृति को नुकसान भी नहीं होता। घरों और दुकानों से निकलने वाले वेस्ट को होली के लिए बचाकर रखा जा सकता है। जिनमें सूखे पेड़, अनुपयोगी कार्टून बॉक्स और दीमक से नष्ट हो चुकी लकडि़यों से भी होली जलाई जा सकती है।

अक्सर यह देखा जाता है कि होली की आग में पुराने टायर, प्लास्टिक मैटेरियल्स यहां तक कि ङ्क्षसथेटिक आइटम्स भी जलाए जाते हैं, जिनसे कार्बन रिलीज होता है। कार्बन प्रोडक्ट्स को जलाने से वायुमंडलीय असंतुलन बढ़ता है। जो सीधे ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनता है। इसलिए कोशिश की जानी चाहिए कि इन्हें होली में न जलाएं। साथ ही प्राकृतिक अपशिष्टों का प्रयोग गैसों का संतुलन बनाए रखता है।